Sawan Ka Mahina | सावन का महीना!

Sawan Ka Mahina aur Mann Kare Sor!!! Sor Nahi Re Baba Shor!

You might have heard this famous Hindi film song (which translates as - missing something badly in the holy month of Monsoon) but...

🕉️ Not eating nonveg on Tuesday...!!!

🕉️ Today is Saturday's fast, so no way...!!!

🕉️ And in the holy month of Monsoon, can't even think about it.....!!!

In this way, there is no dearth of people who call themselves vegetarian in India. This is why, our podcast for today focuses on this topic, written by Vegan Sudesh.

Nowadays, many of these people are turning completely vegetarian due to fear of Corona. But still many of us out of habit, and under the burden of our religious beliefs, have been promoting the business of butchering animals.

Just as parents are responsible for the upbringing of children, in the same way the responsibility of citizens in any country lies with the government.  But during the Corona period, the government has been absolutely failed to guarantee our health and life.  Although, since last few decades, it has been making you cruel in the name of poultry, fisheries, goat / pig / cow rearing etc. "Rearing" is just a name, actually it is business of "killing" innocent animals. Some people have been provided funds in the name of live-stock farming and then these slaughter houses are registered for this business of animal killing. Down the line, by opening non-veg shops on roadside, they push you into the path of cruelty.

These non-veg restaurants and butchers' shops, which flourish on roadside like mushrooms, they are in fact selling cruelty, murder and dead bodies of animals with government licenses. Perhaps most of us may not have raised our voice against it yet, but not anymore! The right time has come for us to permanently close the shops that show us this sight of cruelty on our way every day! Please share this message as much as you can and help your local government to build a public opinion to ban them.

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Thank you!

सावन का महीना औऱ मन करे सोर! सोर नहीं रे बाबा शोर!

ये गाना तो सुना ही होगा आपने...पर

मंगलवार को नानवेज नहीं खाना...!!!

आज शनिवार का व्रत है इसलिए नहीं...!!!

और सावन के महीने में तो सवाल ही नही उठता....!!!

इस तरह से खुद को वेजीटेरीयन बताने वालों लोगों की अपने देश में कोई कमी नहीं है। ऐसा क्यों है आज का हमारा ये पॉडकास्ट इस विषय पर केंद्रित है जो वीगन सुदेश द्वारा लिखा गया है।

आजकल इनमें से बहुत सारे लोग कोरोना के डर के कारण पूर्ण रूप से शाकाहारी बन रहे हैं। पर अभी भी आदत से मजबूर हम में से बहुत सारे लोग अपनी आस्थाओं के बोझ तले जीव हत्या के व्यापार को बढ़ाते आ रहे हैं।

जैसे बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है उसी तरह किसी भी देश में नागरिकों की जिम्मेदारी सरकार की होती है। किन्तु कोरोना काल में सरकार हमारे स्वास्थ्य और जीवन की गारंटी लेने में बिल्कुल असमर्थ रही है। पर वर्षों से ये मुर्गी-पालन, मछली-पालन, बकरी-पालन, सुअर-पालन, गौ-पालन आदि के नाम पर आपसे क्रूरता करवा रही है। "पालन" का तो है बस नाम और निरीह जानवरों की "हत्या" है काम। कुछ लोगों को लाइव-स्टॉक फार्मिंग के नाम पर फंड्स दिया जाता हैं और फिर इस हत्या के कारोबार के लिए ये स्लाटर हाउस रजिस्टर्ड करते हैं। इसके बाद गली-गली में नॉनवेज दुकानें खोलकर आपको क्रूरता के मार्ग में धकेल देते हैं।

मशरूम की तरह गली-गली में पनपे ये नानवेज रेस्टॉरेंट और कसाईयों की दुकानें सरकारी लाइसेंस् युक्त दरअसल निरीह जानवरों के मौत का कारोबार है। शायद हम में से ज्यादातर लोगों ने अभी तक इसके खिलाफ अपनी कोई आवाज नहीं उठाई होंगीं, पर अब और नही! हमें अपने रास्ते से क्रूरता का यह नजारा रोज दिखाने वाली दुकानों को हमेशा के लिए बंद करवाने का सही समय आ गया है! कृपया इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अपने स्थानीय प्रशासन को एक जनमत का निर्माण करने में मदद करें।

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